मुझे कौन जानता है.......
यह अधिक महत्वपूर्ण है बजाए इस के कि मैं किसे जानता हूँ ?
नैनपुर की पैदाइश, बेमेतरा और दुर्ग में शिक्षा के नाम पर टाइमपास करने के बाद कई बरसों से छत्तीसगढ़ में सामाजिक कार्यों के साथ खुदमुख्तारी और मजूरी के बीच; रोज़गार, सरोकार और बेकार की चिन्ताओं को छोड़कर पूरी तरह से समाज सेवा में समर्पित.....
राजनीति करना चाहता था, पर मेरे आदर्श और सिद्धांत मुझे सबसे मूल्यवान लगते हैं, और मैं इनके साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं कर सकता हूँ, गलत को सही दिशा का भान कराना मेरी मजबूरी है , वह बात और है कि मानने वाला उसको माने या न माने।
खैर..... अब पूरी तरह से समाज सेवा में समर्पित हो चूका हूँ, अब फिर राजनीति में लौटना चाहता हूं, लेकिन परंपरागत राजनीति में नहीं। बार-बार खयाल आता है कि क्या मार्क्स की राजनीति गांधी की शैली में नहीं की जा सकती। एक व्यापक जन आंदोलन छेड़ने का पक्का इरादा है।
छत्तीसगढ़ के कुछ उत्साही युवा साथियों को साथ लेकर "हितैषी" NGO के माध्यम से समता मूलक शोषण रहित समुदाय की स्थापना करने के प्रयास में लगा हुआ हूँ...
जिसमें सुचना सब तक पहुंचे एवं विकास की प्रक्रिया में सबकी अपनी समान भागीदारी हो...
इसी लक्ष्य को लेकर राष्ट्र निर्माण की दिशा में युवाओं को सक्रिय योगदान हेतु प्रेरित करने तथा समाज के प्रति उनके दायित्वों का बोध कराने के काम में "हितैषी" NGO के माध्यम से लगा हुआ हूँ, इस अभियान को सफल बनाने के लिए आप लोगों के साथ की आवश्यकता है,
अगर आप लोग मेरे इस प्रयास में स्वैच्छिक रूप से साथ देना चाहते हैं,
तो मुझसे जुड़ें....... "हितैषी" NGO से जुड़ें,
हम आपका स्वागत करते हैं..........
यह अधिक महत्वपूर्ण है बजाए इस के कि मैं किसे जानता हूँ ?
नैनपुर की पैदाइश, बेमेतरा और दुर्ग में शिक्षा के नाम पर टाइमपास करने के बाद कई बरसों से छत्तीसगढ़ में सामाजिक कार्यों के साथ खुदमुख्तारी और मजूरी के बीच; रोज़गार, सरोकार और बेकार की चिन्ताओं को छोड़कर पूरी तरह से समाज सेवा में समर्पित.....
राजनीति करना चाहता था, पर मेरे आदर्श और सिद्धांत मुझे सबसे मूल्यवान लगते हैं, और मैं इनके साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं कर सकता हूँ, गलत को सही दिशा का भान कराना मेरी मजबूरी है , वह बात और है कि मानने वाला उसको माने या न माने।
खैर..... अब पूरी तरह से समाज सेवा में समर्पित हो चूका हूँ, अब फिर राजनीति में लौटना चाहता हूं, लेकिन परंपरागत राजनीति में नहीं। बार-बार खयाल आता है कि क्या मार्क्स की राजनीति गांधी की शैली में नहीं की जा सकती। एक व्यापक जन आंदोलन छेड़ने का पक्का इरादा है।
छत्तीसगढ़ के कुछ उत्साही युवा साथियों को साथ लेकर "हितैषी" NGO के माध्यम से समता मूलक शोषण रहित समुदाय की स्थापना करने के प्रयास में लगा हुआ हूँ...
जिसमें सुचना सब तक पहुंचे एवं विकास की प्रक्रिया में सबकी अपनी समान भागीदारी हो...
इसी लक्ष्य को लेकर राष्ट्र निर्माण की दिशा में युवाओं को सक्रिय योगदान हेतु प्रेरित करने तथा समाज के प्रति उनके दायित्वों का बोध कराने के काम में "हितैषी" NGO के माध्यम से लगा हुआ हूँ, इस अभियान को सफल बनाने के लिए आप लोगों के साथ की आवश्यकता है,
अगर आप लोग मेरे इस प्रयास में स्वैच्छिक रूप से साथ देना चाहते हैं,
तो मुझसे जुड़ें....... "हितैषी" NGO से जुड़ें,
हम आपका स्वागत करते हैं..........
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