

लॉर्ड मैकॉले ने कहा था की हमारा लक्ष्य काले अँगरेज़ पैदा करना है और आज आज़ादी के ६३ साल बाद भारत की आम जानता को अपने ऊपर शासन करने वाले काले अँगरेज़ ही मिले हैं। अगर बात करू पुलिस की तो हमारी पुलिस आज भी वही एक सौ पच्चीस साल पुराने ढर्रे पर ही चल रही , मतलब लाठी और डंडो से । जब जहाँ जिसको चाहती है उठाती है पीटती है और जेल में ठूंस देती है। ठीक वैसे ही जैसे हमारे नाना दादा को गोरे अँगरेज़ मारते और पीटते थे, अब हमे ये काले अँगरेज़ पीटते हैं और बेईज्ज़ती करते हैं । हम आजाद हो गए थे। लेकिन अँगरेज़ अपनी विरासत में हमे दे गए थे अपने द्वारा बनाई गई, शिक्षा , कानून और पुलिस व्यवस्था।
अपने बच्चों को भी भगत सिंह या चंद्रशेखर की कहानी न सुनाइए क्योंकि अगर वो भगत बनेगे तो पुलिस के अत्याचार सहने पड़ेंगे और वो बड़े ही दुखदायी होते है और हाँ उन्हें डॉक्टर या इंजिनियर या प्रोफेसर भी न बनाइये क्योंकि कक्षा ८ पास पुलिस उनकी बेईज्ज़ती करेगी तो आप को थाने में रोना ही आयेगा।
पुलिस का अदना सा सिपाही हमे अपनी ऑंखें तरेर कर क्यूँ दिखाता है ? हम क्यूँ नहीं पुलिस को उसी की ही भाषा में जवाब देते हैं ? क्यूँ नहीं उसे जनता के चार जवानों के कोप का भाजन बनना पड़ता है ? हम लोगों ने सत्रह साल अपने जीवन के सिर्फ शिक्षा ग्रहण करने में लगा दिए हैं, हम शिक्षित लोग हैं॥ हमे कोई दो कौड़ी का नेता कैसे अपनी बातों से धर्म या जाती के नाम पर भड़काने में सफल हो जाता है...... और हम भड़क भी जाते हैं, तो सत्रह साल की शिक्षा गई पानी में....... इससे ठीक तो हम अशिक्षित ही थे ...... कम से कम ये सत्रह साल तो बच जाते.......
जवाब देने का वक़्त है आपके पास ... अगर तुम्हारे अन्दर चंद्रशेखर, भगत सिंह या अशफाक उल्ल्हा का खून है तो इन रक्त्खोरो को जवाब देने का समय आ गया है.......
खैर देर अभी भी नहीं हुई है जब जागो तभी सवेरा....
खैर देर अभी भी नहीं हुई है जब जागो तभी सवेरा....